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Wednesday, July 6, 2011

Article On My Ramayana in the newspaper!

महर्षि वाल्मीकि व गोस्वामी तुलसीदास की रचनाओं को आधार बनाकर शहर के 14 वर्षीय बालक राघव शर्मा ने रामायण को सहज काव्य रूप में लिख कर शोध व लेखन प्रतिभा का अद्भुत परिचय दिया है। सेक्टर-सात निवासी विक्रम व अनु शर्मा के पुत्र राघव को अपनी कृति को पूरा करने में दो वर्ष से अधिक का समय लगा।

सेक्टर-नौ स्थित सेंट एंथनी स्कूल में 10वीं के छात्र राघव ने 12 वर्ष की उम्र से ही राम कथा को काव्य रूप में लिखना शुरू कर दिया था। इस संबंध में उसने बताया कि एक टीवी चैनल पर रामायण दिखाई जा रही थी। स्कूल में शून्य पीरियड में रामायण के दृश्य सामने आए और मन में विचार आया कि क्यों न इन प्रसंगों को सरल भाषा में कविता की पंक्तियों में लिखा जाए। कक्षा में बैठे-बैठे ही जब दो-चार पंक्तियां लिखीं और घर आकर अपनी मां को दिखाई, तो माता ने प्रोत्साहित किया, इसके बाद आगे लिखता चला गया।

मास्टर राघव ने रामायण के प्रसंगों को विस्तृत रूप से जानने के लिए वाल्मीकीय रामायण, तुलसीकृत रामचरित मानस और मैजिक पॉट से प्रभु राम से संबंधित पौराणिक कथाओं का सहारा लिया। पिछले दिनों जब काव्य रचनाएं पूरी हो गई, तो इसे प्रकाशित करवा दिया।

राघव की 123 पृष्ठों वाली 2200 लाइनों की कृति में रामायण को बाल कांड (राम जन्म) से लंका कांड (अयोध्या लौटने) तक छह भागों में विभाजित किया गया है और हर भाग में विभिन्न प्रसंगों को आगे उपभागों में बड़ी ही गहराई से कविता रूप में पिरोया गया है।

कृति की खास बात यह भी है कि इसमें कई ऐसे प्रसंगों को भी कविता रूप में चित्रण किया है, जिनके बारे में आम जनमानस को ज्यादा नहीं पता है। राम-सीता विरह, मंथरा द्वारा कैकेयी की बुद्धि परिवर्तित किया जाना, लक्ष्मण के हाथों शूर्पनखा के पुत्र का वध, गिलहरी की पीठ पर धारियों के निशान आदि ऐसे प्रसंग हैं, जिसे अपनी कृति के माध्यम से राघव ने रोचकता प्रदान की है।

राघव ने अपनी इस काव्य रचना की शुरुआत के दो प्रसंगों को हिंद युग्म वेबसाइट पर डाला, तो पूरे देश के विभिन्न हिस्सों से लोगों ने अपनी टिप्पणियों के साथ खूब सराहा।

मास्टर राघव की प्रतिभा यहीं खत्म नहीं होती। वह 20 से अधिक कंप्यूटर गेम बना चुका है। वॉल पेपर डिजाइनिंग, वेब डिजाइनिंग, अंग्रेजी उपन्यास लेखन आदि में माहिर है और मित्र मंडली में खूब लोकप्रिय है।

राघव की कृति चमत्कार से कम नहीं : डा.बलदेव वंशी

राघव ने अपनी कृति हिंदी भाषा के कई विद्वानों को भेंट की है। उसकी रचना को पढ़ कर सामाजिक व अध्यात्मिक विषय पर एवं प्रमुख संतों पर 100 से अधिक किताबें लिख चुके डा.बलदेव वंशी ने कहा कि आज के युग में एक किशोर द्वारा राम और रामायण में रुचि लेना तथा रामायण कथा काव्य रूप में लिख देना सचमुच चमत्कार जैसी बात है।

राघव द्वारा रचित राम विवाह प्रसंग की कुछ पंक्तियां

राम देखें सीता को, तो सीता देखें राम को।

होले-होले जप हरी थी सीता श्री राम के नाम को।

मिथिला का वातावरण अति पवित्र और पावन हुआ था।

क्योंकि उस भूमि को नारायण अवतार के श्री चरणों ने छुआ था।

राम विवाह में संपूर्ण जग जश्न मना रहा था।

हर कोई हर्षोल्लास में डूबा जा रहा था।

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