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Thursday, May 1, 2008

Ramayan

आइये मेरे राघव शर्मा के साथ और जानिए वह सुनहरा युग ,, जिसे ज्ञात कर अंधकार भी बिना दिए के रोशन हो जाता हैं . सुनिए एक अपूर्व गाथा श्री राम के जनम से रावण वध की पूरी देविक कहाँनि i एक कविता के रूप में
रामायण
राजा दशरथ धे चिंता में लेते , सोच रहे थे मेरे नही हैं बेटे
वेह थे चिंता से बिल्कुल मौन , मेरे बाद अयोध्या पति बनेगा कौन
एक दिन आए ऋषि वशिष्ट और दिया सुजाव एक , दूर गुफा में हैं एक संत बड़े ही नेक
उनसे करवाओ एक दिव्य यज्ञ टंकी अयोध्या की कीर्ति हो जाया सर्वज्ञ
कुछ समय पश्चात , झूम उद्इ अयोधा सारी , खिल उधि ठेरों फूलों की क्यारीन
राजा की थी तीन रनिया प्यारी , कौशल्या , सुमित्रा और कैकियी सबसे दुलारी
राजा की थी तीन रनिया प्यारी , कौशल्या , सुमित्रा और कैकियी सबसे दुलारी
दिव्य यज्ञ हुआ फलीभूत , और अयोध्या की खुशी चाई सर्याग्य
खुशिओं की थी चाई रीत , सब देवता झूमे और गाने लगे गीत
उस दिन था बढ़ा ही शुभ्वार , जब जनम लिए विष्णु अवतार

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